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दिल

बनी तो बलवान मास से फिर भि दिल जो हे,
टुट्ता लेकिन सिस जैसा हरवार ये क्यु हे?

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शुन्य

शून्य पे सवार हूँ बेअदब सा मैं खुमार हूँ अब मुश्किलों से क्या डरूं मैं खुद कहर हज़ार हूँ मैं शून्य पे सवार हूँ मैं शून्य पे सवार हूँ # ज़ाकिर ख़ान

चिहान

चिहान ठूलो संसारमा मन मान्छेको । भेटिन्छ जहाँ कंकाल हजारौं सपनाको ।।