हरेक दिन असंख्य इच्छा र चाहनाको निर्मम हत्या हुने यो मन अनि मुटु वधशाला भन्दा कहा कम रहेको छ र??
शून्य पे सवार हूँ बेअदब सा मैं खुमार हूँ अब मुश्किलों से क्या डरूं मैं खुद कहर हज़ार हूँ मैं शून्य पे सवार हूँ मैं शून्य पे सवार हूँ # ज़ाकिर ख़ान
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